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अंगुलियों के पौरों में छिपी होती है भविष्य सूचक घटनाएं

 हस्त रेखा शास्त्र : अंगुलियों के पौरों में छिपी होती है भविष्य सूचक घटनाएंप्राचीन भारतीय ज्योतिष विद्या की बहुत सी शाखाओं में से एक शाखा हस्त रेखा शास्त्र भी है। बहुत से लोग इस बात से अनभिज्ञ हैं कि हाथों की रेखाओं के अलावा आपकी अंगुलियों की बनावट और उसके पौर पर बने चिन्ह भी आपके भविष्य का निर्धारण करने में सक्षम हैं। वैसे भी हाथ की अंगुलियों में कई ऐसे राज छुपे होते हैं, जो आपके भविष्य में घटने वाली घटना की पूर्व में सूचना देते हैं। भारतीय संस्कृति की यह प्राचीन दिव्य विद्या, चमत्कृत कर देने वाली हैं।

हस्त रेखा शास्त्र के अनुसार अंगुलियों के पौरों में साधारणत: चार प्रकार के चिन्ह होते हैं।

उर्ध्वाकार रेखाएं ये रेखा ऊपर की ओर जाती हैं। जो आपकी ऊँची सोच, सकारात्मक ऊर्जा व अध्यात्म की सूचक है।

जाली अंगुलियों पर पड़ी जालियां द्विस्वभाव, गलत संगति, कन्फयूज माइंड बनाती है। यह दिशाहीन ऊर्जा की सूचक है।

क्रॉस कुछ व्यक्ति निर्णय जल्दी- जल्दी बदलते हैं और अपनी ऊर्जा का सदुपयोग न करके उसका दुरुपयोग करते हैं।

अनुप्रस्थ रेखाएं यह अवनति व तनाव देती हैं। व्यक्ति जीवन में असफलता के कारण तनावग्रस्त हो सकता है। इन रेखाओं के कारण कार्य में रुकावट व असफलताओं का सामना करना पड़ता है।

हस्त रेखा शास्त्र के अनुसार अंगुलियों पर बने इन चिन्हों का प्रभाव

तर्जनी अंगुली के पह्ले पोर पर उर्ध्वाकार रेखाएं यदि आपकी तर्जनी अंगुली के पह्ले पोर पर उर्ध्वाकार रेखाएं है तो वह आपको नये कार्यों के लिये प्रेरित करती हैं। आध्यात्मिक स्तर के प्रति रूझान व पॉजीटिव लाइफ जीने की सोच पैदा करती है।

तर्जनी अंगुली के पह्ले पोर पर जालियां इस तरह के व्यक्ति एकांतप्रिय होते हैं। यह जालियां कारावास का भी सूचक है।ऐसे व्यक्ति के मित्र कम होते हैं।

तर्जनी अंगुली के पह्ले पोर पर क्रॉस हस्त रेखा शास्त्र के अनुसार तर्जनी अंगुली पर क्रॉस कल्पनाशील बनाता है। ऐसा व्यक्ति काल्पनिक दुनिया में जीना पसंद करता है। अपनो से दूर होता है।

तर्जनी अंगुली के पह्ले पोर पर अनुप्रस्थ रेखाएं यह रेखाएं जीवन में असफलता का सूचक है।ऐसा व्यक्ति, किसी इच्छा के पूरे न होने से हमेशा तनाव मे रहता है। सफलता का मार्ग अवरुद्ध होता है।

तर्जनी अंगुली के दूसरे पोर पर उर्ध्वाकार रेखाएं तर्जनी अंगुली के दूसरे पोर पर रेखाएं, व्यक्ति को आदर्शवादी, अपने नियमों का पक्का व नीतिवादी बनाती हैं। यह रेखाएं आध्यात्मिक ऊंचाइयां देती है।

तर्जनी अंगुली के दूसरे पोर पर जालियां तर्जनी अंगुली के दूसरे पोर पर बनी जालियां व्यक्ति को स्वार्थ और कपट की भावना देती हैं। जीवन में अध्यात्म व धर्म की कमी रहती है। ऐसा व्यक्ति मित्रों व सगे -संबंधियों से छल करने वाला होता है।

तर्जनी अंगुली के दूसरे पोर पर क्रॉस तर्जनी अंगुली के दूसरे पोर पर क्रॉस, व्यक्ति में ईष्या, दूसरों को धोखा देने वाला, झूठ बोलने वाली प्रवृत्ति देता है। ऐसे व्यक्ति कठोर हृदय व षड्यंत्र रचने वाले बेइमान हो सकते हैं।

तर्जनी अंगुली के दूसरे पोर पर अनुप्रस्थ रेखाएं ऐसा व्यक्ति जैसा सोचता है, जीवन में वैसा नहीं हो पाता है। जीवन में असफलता और रुकावटें बहुत आती है।

तर्जनी अंगुली के तीसरे पोर पर उर्ध्वाकार रेखाएं तर्जनी अंगुली के तीसरे पोर पर यदि उर्ध्वाकार रेखाएं हो तो राजनीति में लाभ व नेतृत्व की क्षमता मिलती है, साथ मे व्यक्ति की वाणी विशेष प्रभावशाली होती हैं।

तर्जनी अंगुली के तीसरे पोर पर जालियांहस्त रेखा शास्त्र के अनुसार ऐसा  व्यक्ति श्रम अधिक करता है व फल की प्राप्ति कम होती है। व्यय बहुत अधिक होता है।

तर्जनी अंगुली के तीसरे पोर पर क्रॉस तर्जनी अंगुली के तीसरे पोर पर बने क्रॉस के निशान व्यक्ति को कठोर बनाते हैं। व्यक्ति दूसरों की भावनाओं को समझने में असफल होता है। रिश्तों में तनाव व परेशानी रहती है।

तर्जनी अंगुली के तीसरे पोर पर अनुप्रस्थ रेखाएं तर्जनी अंगुली के तीसरे पोर पर यह रेखाएं इच्छाएं पूरी न होने के कारण व्यथित और चिंतित मन का सूचक हैं। असफलता के कारण ऐसे व्यक्ति में इच्छा शक्ति की कमी व तनाव पैदा करती हैं।

अनामिका अंगुली के पह्ले पोर पर उर्ध्वाकार रेखाएं हस्त रेखा शास्त्र के अनुसार यह रेखाएं व्यक्ति के अंदर विशेष ऊर्जा का प्रतीक है। ऐसे लोग कलाप्रिय होते हैं व अपने कार्यों को विशेष रुचि से करते हैं। संवेदनशीलता इनके स्वभाव में होती हैं।

अनामिका अंगुली के पह्ले पोर पर जालियां ऐसी जालियों के चिन्ह् वाले व्यक्ति चिंतामयी व अवसादग्रस्त होते हैं। व्यक्ति दुख व पीड़ादायक जीवन जीता है। उसे जीवन में इच्छाएं पूरी न होने के कारण मिली मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ता है।

अनामिका अंगुली के पह्ले पोर पर क्रॉस यहां क्रॉस के चिन्ह, व्यक्ति को अनैतिकता व अशिक्षित बनाते हैं। व्यक्ति सामाजिक रीतियों को मानने में असमर्थ व अनुशासन के नियमों का उल्लंघन करने वाला, जिद्दी व क्रोधी होता है। मिथ्या और अहंकार  के कारण बार बार अपमानित होना  पड़ता है।  ऐसा व्यक्ति बोलता पह्ले है और सोचता बाद मे है।

अनामिका अंगुली के पह्ले पोर पर अनुप्रस्थ रेखाएं ऐसे व्यक्ति स्वतंत्रतापूर्वक अपनी कला का प्रदर्शन करना चाहते हैं। इनमें प्रतिभा होती है पर अनेक बंधनों के कारण ये अपने कार्यों और आंतिरक इच्छाओं को पूरा करने में असफल रहते हैं।

अनामिका अंगुली के दुसरे पोर पर उर्ध्वाकार रेखाएं अनामिका अंगुली के दूसरे पोर पर उर्ध्वाकार रेखाएं  होने से व्यक्ति अच्छे व्यापारी होते हैं। तीव्र बुद्धि होने के कारण वे अपने कार्यों को निपुणता से करते हैं। सात्विक गुणों से संपन्न होते हैं।

अनामिका अंगुली के दुसरे पोर पर जालियां आंतरिक रुचि व समझ की परिचायक हैं। ऐसे लोग   दूसरों की प्रगति से ईर्ष्या करने वाले तनावग्रस्त होते हैं। ऐसा व्यक्ति जोश में निर्णय लेते हैं।

अनामिका अंगुली के दुसरे पोर पर क्रॉस हस्त रेखा शास्त्र के अनुसार ये चिन्ह गलत संगति में जाने व उसके प्रभावों का सूचक है। ऐसा व्यक्ति अपनी सकारात्मक ऊर्जा का उपयोग नही कर पाता हैं।

अनामिका अंगुली के दुसरे पोर पर अनुप्रस्थ रेखाएं इस तरह की रेखाएं, व्यक्ति में आगे बढ़ने की चाह के कारण उसे तनावग्रस्त बनाती हैं। यह रेखाएं अनामिका अंगुली के इस हिस्से में अशुभता देती है क्योंकि लगातार असफलता से आत्मविश्वास डगमगाने लगता है।

अनामिका अंगुली के तीसरे पोर पर उर्ध्वाकार रेखाएं – ऐसा व्यक्ति कुशल शिल्पकार या दस्तकार होता हैं। जो अपनी पूरी मेहनत व लगन से कल्पनाओं को साकार करते हैं। कल्पना करने की क्षमता और बारीकी से कला को समझने का ज्ञान इन्हें यश व कीर्ति देता है।

अनामिका अंगुली के तीसरे पोर पर जालियां यह जालियां कला व संगीत प्रिय व्यक्तियों की सूचक हैं। जो इस क्षेत्र में अपनी लगन व धुन से कुछ कर दिखाने का उत्साह रखते हैं।

अनामिका अंगुली के तीसरे पोर पर क्रॉस ऐसे व्यक्ति स्वयं को अधूरा मानते हैं। वे अपनी कमियों के बारे में सोच-सोच कर ग्लानि की भावना में जीने वाले होते हैं ।

अनामिका अंगुली के तीसरे पोर पर अनुप्रस्थ रेखाएं ये अनुप्रस्थ रेखाएं यहां जीवन की सफलताओं का मार्ग अवरुद्ध करती हैं। किसी भी कार्य को पूरे उत्साह और मेहनत से करने पर भी सफलता के मार्ग मे बार बार रुकावटें आती हैं।

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