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आपका भाग्य कहीं बंधा तो नहीं है ?

ईमानदारीपूर्वक और कठिन परिश्रम करने के बावजूद भी नौकरी नहीं मिलती हो।तो समझ लेना चाहिए, कि भाग्य साथ नहीं दे रहा है। कठिन परिश्रम के बाद भी किस्मत, आपका साथ नहीं दे, और धक्के खाने पड़े तो व्यक्ति निराश हो जाता है। लगातार मेहनत और व्यापार करने पर लाभ की जगह घाटा हो रहा हो। ईमानदारीपूर्वक और कठिन परिश्रम करने के बावजूद भी नौकरी नहीं मिलती हो। योग्यता व पात्रता  होने के बावजुद अच्छे वेतन नहीं मिलता हो। आपके जूनियर को तरक्की मिल जाय और आप इसी पद पर वर्षों से रहे। यदि मेहनत, श्रम और ईमानदारी से काम करने और योग्यता के आधार पर यश, धन, नौकरी, व्यापार, पढ़ाई, विवाह, मकान, दुकान और सेहत का सुख नहीं मिले। लगातार व्यपार मे हानि, अपयश, रोग, दरिद्रता, कम तनख्वाह, किराये के मकान में रहना आदि दुख पीछा नहीं छोड़ता हो, तो समझ लेना चाहिए, कि भाग्य साथ नहीं दे रहा है।

प्रश्न उठता है कि आखिर आप के साथ ही ऐसा क्यों होता है ?

ज्योतिष के माध्यम से आपकी जन्मकुंडली में ग्रहों के प्रभावों का विश्लेषण करें। कौन से ग्रह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कष्टों और दु:खों को बड़ा राहत देता है। कौन से लग्न में ग्रहों के प्रभाव भिन्न-भिन्न प्रभाव दिखाते हैं।

  1. भाग्य की बाधा के लिये जन्मपत्री में नवम भाव व नवमेश का गहराई से अध्ययन करना चाहिए।
  2. नवम से नवम अर्थात पंचम भाव व पंचमेश की स्थिति का भी निरीक्षण ध्यानपूर्वक करना चाहिए।
  3. भाग्य-यश के दाता सूर्य की स्थिति, पाप ग्रहों या नीच ग्रहों की दृष्टि के प्रभाव में तो नहीं है।
  4. धन, वैभव, नौकरी, पति, पुत्र व समृद्धि का दायक गुरु कहीं नीच का होकर पाप प्रभाव में तो नहीं है।
  5. लग्नेश व लग्न पर कहीं पाप व नीच ग्रहों का प्रभाव तो नहीं है।

भाग्य में बाधा डालने वाले कुछ योग –

  1. लग्नेश यदि नीच राशि में, छठे, आठवे, 12 भाव में हो तो भाग्य में बाधा आती है।
  2. राहू यदि लग्न में हो, मंगल चतुर्थ स्थान में हो तथा नीच का शनि जन्मपत्री में किसी भी स्थान में हो तो भाग्य में बांधा आती है।
  3. लग्नेश यदि सूर्य, चंद्र व राहू के साथ 12वें भाव में हो तो भाग्य में बाधा आती है।
  4. लग्नेश यदि तुला राशि के सूर्य तथा शनि के साथ छठे, 8वें भाव में हो तो जातक का भाग्य साथ नहीं देता।
  5. पंचम भाव का स्वामी यदि नीच का हो या वक्री हो तथा छठे, आठवें, 12वें भाव में स्थित हो तो भाग्य के धोखे सहने पड़ते हैं।
  6. पंचम भाव का स्वामी तथा नवमेश यदि नीच के होकर छठे भाव में हो तो शत्रुओं द्वारा बाधा आती है।
  7. पंचम भाव पर राहु, केतु तथा सूर्य का प्रभाव हो, लग्नेश छठे भाव में हो तो पितृदोष के कारण भाग्य में बाधा आती है।
  8. मकर राशि का गुरु पंचम भाव में यदि हो तो भाग्य के धक्के सहने पड़ते हैं।
  9. पंचमेश यदि 12वें भाव में, मीन राशि के बुध के साथ हो तो भाग्य में बाधा आती है।
  10. पंचम या नवम भाव में सूर्य उच्च के शनि के साथ हो तो भाग्य में बाधा देखी जाती है।
  11. नवम भाव में सूर्य के साथ शुक्र यदि शनि द्वारा देखा जाता हो। तो भाग्य साथ नहीं देता।
  12. नवमेश यदि 12वें या 8 वें भाव में पाप ग्रह द्वारा देखा जाता हो, तो भाग्य साथ नही देता।
  13. नवम भाव का स्वामी 8वें भाव में राहु के साथ स्थित हो तो पग-पग पर ठोकरे खानी पड़ती है।
  14. नवमेश यदि द्वितीय भाव में राहु या केतु के साथ हो और शनि के द्वारा देखा जाता है, तो व्यक्ति का भाग्य बंध जाता है।
  15. नवमेश यदि द्वादश भाव में षष्ठेश के साथ स्थित होकर पाप ग्रहों द्वारा देखा जाता हो, तो बीमारी, कर्जा व रोग के कारण कष्ट उठाने पड़ते है।
  16. नीच का गुरु नवमेश के साथ अष्टम भाव में राहु, केतु द्वारा दृष्ट हो तो भाग्य साथ नहीं देता।
  17. यदि नीच का गुरु छठे, 8वें, या 12वें भाव मे हो और राहु या शनि द्वारा देखा जाता हो तो भाग्य साथ नहीं देता।

भाग्य बाधा निवारण के उपाय

सूर्य, गुरु, लग्नेश व भाग्येश के शुभ उपाय करने से भाग्य संबंधी बाधाएं दूर हो जाती है।

  1. गायत्री मंत्र का जाप करके भगवान सूर्य को जल दें।
  2. प्रात:काल उठकर माता-पिता के चरण छूकर आशीर्वाद लें।
  3. अपने ज्ञान, सामर्थ और पद प्रतिष्ठा का कभी भी अहंकार न करें।
  4. किसी भी निर्बल व असहाय व्यक्ति की बददुआ न ले।
  5. वृद्धाश्रम और कमजोर वर्ग की तन, मन और धन से मदद करें।
  6. सप्ताह में कम से कम एक दिन मंदिर, मस्जिद या गुरुद्वारा {अपने धर्म के अनुसार} जाकर ईश्वर से शुभ मंगल की प्रार्थना करें। मंदिर निर्माण में लोहा, सीमेंट, सरिया इत्यादि का दान देकर मंदिर निर्माण में मदद करें।
  7. पांच सोमवार रुद्र अभिषेक का पाठ करने से भाग्य संबंधी अवरोध दूर होते है।
  8. ‘ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय’। इस द्वादश अक्षर मंत्र का 108 बार रोज जाप करने से बंधा हुआ भाग्य खुलने लगता है।
  9. प्रति दिन महिसासुरमर्दिनि का पाठ करने से भाग्य की बाधा दूर होती है ।

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