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रविवार व्रत से सर्व मनोकामना पूर्ण होती है

pic-116 सुख-समृद्धि और सर्वमनोकामना की पूर्ति के लिए किये जाने वाला रविवार के व्रत की महिमा अपरंपार है। इससे न केवल शत्रु पर विजय की प्राप्त होती है, बल्कि संतान प्राप्ति के भी योग बनते हैं। साथ ही यह व्रत नेत्र रोग और कुष्ठ रोग के निवारण के लिए भी किया जाता है। रविवार के दिन भगवान सूर्य की आराधना सूर्य ग्रह के प्रभाव को सकारात्मक बनाने के लिए की जाती है। सूर्य ग्रह की शांति के लिए मानिक रत्न धारण करना चाहिए।  लाल कपड़े के दान को शुभ और फलदायी बताया गया है। इसे इतवारी व्रत के नाम से भी जाना जाता है।

क्यों करें?

यदि किसी की कुंडली में सूर्य के अलावा कोई अन्य ग्रह अशुभ प्रभाव दे रहा हो और किसी विशेष कार्य में बाधा उत्पन्न हो रही हो, तो वैसे व्यक्ति को रविवार का व्रत करना चाहिए। इसके अतिरिक्त यह व्रत अच्छी सेहत और तेजस्विता देता है। स्वभाव में आत्मविश्वास आता है। आयु और सौभाग्य में बृद्धि होती है। स्त्रियों में इस व्रत से संतानहीनता दूर होती है।

कैसे करें ?

1. यह व्रत सूर्याष्ठी- सप्तमी या शुक्ल पक्ष के प्रथम रविवार से आरंभ कर प्रत्येक रविवार को 12 सप्ताह या पूरे एक साल रखना चाहिए। विशेष कामनाओं के लिए इसे बारह साल तक किया जा सकता है। व्रत के दिन तेल और नमक का परहेज करते हुए सूर्य भगवान का ध्यान करना चाहिए।  इसे एक दिन के उपवास के साथ विधिपूर्वक इस प्रकार से किया जाता है।

2. रविवार को सूर्योदय से पहले उठकर नित्यकर्म से निपटने और स्नानादि कर घर के ईशान कोण में किसी पवित्र स्थान पर भगवान सूर्य की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करनी चाहिए।

3. व्रत के लिए संकल्प के बाद सुगंध, धूप, फूल, दीप आदि से लाल चंदन का तिलक लगाकर सूर्य देव की पूजा करनी चाहिए। पूजा के लिए लाल रंग का फूल  शुभ होता है।दोपहर के समय एक बार फिर भगवान सूर्य को अर्ध्य देकर पूजा के बाद कथा करना या सुनना  चाहिए।

4. व्रत के दिन सिर्फ गेंहू के आटे की रोटी गुड़ के साथ सेवन करना चाहिए। साथ में दलिया, घी और शक्कर हो सकता है। किसी कारण सूर्य अस्त हो जाने तक भोजन नहीं कर पाने की स्थिति में अगले दिन के सूर्योदय तक निराहार रहना चाहिए। प्रातः स्नानादि कर सूर्य भगवान को अर्ध्य देने के बाद ही भोजन ग्रहण करना चाहिए।

विशेष-

 ज्योतिष विज्ञान में सूर्य को आत्मा का कारक बताया गया है। इससे ही करियर और कारोबार में उन्नति के लिए आत्मविश्वास आता है। राजकीय हो या फिर आपका कार्यक्षेत्र, उनमें मान-सम्मान तभी मिल पाता है जब आपकी कुंडली में सूर्य अनुकूल हो। सूर्य के प्रतिकूल होने की स्थिति में  अनगिनत असफलताएं आ जाती हैं। इस तरह की परिस्थतियों में सूर्य यंत्र की प्रतिष्ठा कर धारण करने से शीघ्र लाभ मिलता है। पौष मास के रविवार और सूर्य यंत्र एवं मंत्रों के महत्व का बखान विभिन्न शास्त्रों में किया गया है। पौष मास के रविवार को  नमक रहित भोजन करने के विशेष  फायदे बताए गए हैं।

सूर्य यंत्रः

 इस यंत्र को धारण करने से पहले इसे भगवान विष्णु के सम्मुख रखकर पूजन करना चाहिए। इसके लिए हरिवंश पुराण की कथा का आयोजन भी करवाया जा सकता है।

मंत्र-

सूर्य भगवान को प्रसन्न करने के लिए आसानी से उच्चारण के साथ पाठ किये जाने वाले महत्वपूर्ण मंत्र इस प्रकार हैं-

ऊँ घृणिं सूर्य्य आदित्य:

ऊँ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवंछित फलम् देहि देहि स्वाहा।

ऊँ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयोमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकरः।

उच्चारण दोष नहीं होने की स्थिति में आदित्य हृदय स्तोत्र का जाप किया जाना चाहिए

{ लेखक: शंभु सुमन }

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