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क्या आपका घर ईशान मुखी है ?

क्या आपका घर ईशान मुखी है ? किसी भी मकान के मुख्य द्वार की स्थिति का सीधा संबंध उस घर में रहने वाले लोगों की सामाजिक, आर्थिक और मानसिक स्थिति से होता है।। इसलिए घर का मुख्य द्वार वास्तु दोष से मुक्त होना अत्यंत आवश्यक है। वास्तु शास्त्र में ईशान मुखी भवन का विषेश महत्व है। ईशान दिशा के प्रतिनिधि ग्रह बृहस्पति और स्वामी, भगवान शिव हैं। ईशान मुखी मकान में कुछ बातों का ध्यान रखने से वास्तु दोषों का निवारण बड़े ही सरल ढ़ंग से किया जा सकता है। ईशान मुखी भूखण्ड पर निम्न वास्तु सिद्धांतों का पालन करने से, जीवन में सुख- शांति और समृद्धि को आमंत्रित कर, परिवार को खुशहाल बनाया जा सकता है।

शुभता के लिये

  1. ईशान मुखी भवन,वंश वृद्धि, खुशहाली, ऐश्वर्य व शुभ फल देने वाला होता है। ऐसे भूखण्ड पर निर्माण कार्य करते समय अन्य दिशाओं, विशेषकर दक्षिण- पश्चिम की तुलना मे ईशान कोण ऊँचा नहीं बनाना चाहिये।
  2. ईशान कोण कटा व ढका भी नहीं होना चाहिए।
  3. हर प्रकार के सुख, सम्पन्नता व ऐश्वर्य लाभ के लिये ईशान कोण नीचा होना चाहिए। ऐसा करने से सुख-सम्पन्नता व ऐश्वर्य लाभ होगा। ईशान कोण यदि ऊँचा रखेंगे तो धनहनि के कारण कंगाल भी हो सकते हैं।
  4. ईशान मुखी भूखण्ड के सम्मुख नदी, नाला, तालाब, नहर तथा कुआं होना सुख -शांति व समृद्धि का प्रतीक है।। इस घर मे वंश की वृद्धि, धन-संपत्ति का विशेष लाभ होता है।
  5. ईशान कोण के भाग को रोज ही साफ रखें। यहां कूड़ा-करकट आदि नहीं रखें। झाडू भी इस स्थान पर न रखें।
  6. ईशान कोण भूखण्ड में आगे का भाग खाली रखें। कोई भारी वस्तु इस दिशा में नहीं रखें।
  7. भवन के चारों ओर की दीवार बनाएं तो ईशान दिशा की ओर ऊंची न रखें।
  8. ईशान कोण में रसोई घर न रखें वरना घर में अशांति, कलह व धन हानि होने की संभावना रहती है।
  9. ईशान मुखी भूखण्ड पर ईशान की ओर ही मुख्य द्वार बनवायें।
  10. घर का जल, ईशान दिशा से बाहर निकाले। फर्श का ढलान यदि पूर्व की ओर हो तो शुभ है। परिवार के सदस्य निरोगी रहेंगे।
  11. ईशान दिशा में भवन के सामने ऊँचे टीले या ऊँचा निर्माण नहीं होना चाहिए। अन्यथा धन हानि व संतान सुख में हानि रहेगी।
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