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प्रात: बिस्तर छोड़ने से पहले अपने हाथों को देखें

haath-dekhna धर्मशास्त्रों ने प्रात: उठने से पहले मनुष्य के प्रथम कर्तव्य, प्रभु का स्मरण करना बताया है। प्रभु की कृपा से ही मनुष्य को यह अत्यंत दुर्लभ देह प्राप्त हुई है, जो समस्त सृष्टि के कण-कण में विद्यमान है, जिसकी कृपा से मनुष्य सब प्रकार के भय और कष्ट से मुक्त हो जाता है, प्रात: काल में भगवान के स्मरण से हमारे मन में आत्मविश्वास और दृढ़ता की भावना उत्पन्न होती है, और हमारा सारा दिन मंगलमय वातावरण में व्यतीत होता है।, प्रत्येक व्यक्ति को अपने-अपने विश्वास और भावना के अनुसार भगवत स्मरण करना चाहिए। धर्मशास्त्रों में कहा गया है :-

प्रात: स्मरामि भवभीतिमहार्तिशान्तैय, नारायणं गरुडवाहनमब्जनाभम।

ग्रहाभिभूतवरवारणमुक्तिहतूं, चक्रायुध्रं तरुयावारिज-पत्र-नेत्रम।।

कर दर्शन:

कराग्रे वसते लक्ष्मी करमध्ये सरस्वती।

करमूले तु गोविन्द: प्रभाते करदर्शनम्।

उपर्युक्त श्लोक बोलते हुये अपने हाथों को देखना चाहिये। इस श्लोक का अर्थ है-

“हाथ के अग्रभाग में लक्ष्मी का निवास है, हाथ के मध्य भाग में सरस्वती रहती है, और हाथ के मूल भाग में गोविंद भगवान रहते हैं। इसलिए प्रात:काल अपने हाथों का दर्शन करना चाहिए।“

इससे मनुष्य के ह्रदय में आत्म निर्भरता और स्वावलंबन की भावना का उदय होता है। वह जीवन के प्रत्येक कार्य में दूसरों की तरफ ही देखने का अभ्यासी बन जाता है। संसार में मनुष्य जो भी कार्य करता है वह हाथ से ही करता है, मूल श्लोक में बताया गया है कि मानव जीवन की सफलता के लिए संसार में तीन चीजों की आवश्यकात है। धन, ज्ञान, और ईश्वर। इन में से एक के बिना भी जीवन अधुरा है। इसलिए करतल अवलोकन करते हुए श्लोक पठित भावना को आत्मसात करना चाहिए, ताकि हमे जीवन में सफलता मिल सके जाएं।

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