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मंगलवार व्रत से दूर होता है अमंगल

mangalvar-vrat मंगलवार को भगवान हनुमान का भी दिन माना गया है। ज्योतिष के अनुसार ग्रहों के अशुभ प्रभाव को खत्म करने के लिए पीड़ितों को उपवास और हनुमान की आराधना करने से मंगलकारी परिणाम मिलते हैं। अर्थात किसी व्यक्ति की कुंडली में कोई ग्रह अशुभ बना हुआ हो या किसी विशेष कार्य में बाधा आ रही हो, तो मंगलवार का विधि पूर्वक व्रत करने से भरपूर लाभ मिलता है। अर्थात जिस व्यक्ति की कुंडली में मंगल की महादशा, प्रत्यंतर दशा आदि गोचर में अनिष्टकारी बन गई हो, या कुंडली मे मांगलिक दोष हो, उनके लिए यह व्रत महत्व रखता है। साथ ही यह सर्वसुख, मान-सम्मान, शत्रुदमन, रक्त विकार, राज्य और संतान प्राप्ति के लिए भी किया जाता है।

क्यों करें ?

यदि आप संतान की कामना करते हैं। अस्वस्थता से परेशान हैं। किसी कार्य में बाधा आ रही है। दुश्मनों से परेशानी है। कानूनी अड़चनें आ गई हैं। आपके सुख और साम्राज्य पर ग्रहण लग चुका है। या फिर आप अपने सम्मान, बल, साहस और पुरुषार्थ में बढ़ोत्तरी चाहते हैं, तो  मंगलवार के व्रत के साथ-साथ इस दिन की कथा को सुनना चाहिए। इससे मंगल ग्रह के दोष दूर हो जाते हैं। वैसे इस व्रत को कई जगहों पर भूत-प्रेतादि बाधाओं से मुक्ति के लिए भी किया जाता है। मंगलवार का व्रत स्वभाव में उग्रता या हिंसक प्रवृति को खत्म करता है। मन में अद्भुत शांति का प्रवाह होता है। यही कारण है कि प्रत्येक मंगलवार को हनुमान की पूजा का विशेष महत्व है। हनुमान की उपासना का अर्थ है मानसिक संतुष्टि, सुख, धन और यश पाना तथा सभी तरह के पापों से मुक्ति।

कैसे करें ?

  1. इस व्रत को सात्विक विचारों के साथ शुक्ल पक्ष के पहले मंगलवार से रखा जाता है, जो सामर्थ के अनुसार 21 सप्ताह तक किया जाता है। व्रत की शुरुआत मानसिक रूप से तैयारी के साथ सुबह सूर्योदय से पहले उठकर करनी चाहिए। नित्यकर्म से निबटकर और स्नान के बाद लाल व्रस्त्र धारण कर लेना चाहिए।
  2. पूजा के लिए हनुमान-मंदिर या घर का एकांत स्थान या आंगन हो सकता है। घर के ईशान कोण में हनुमानजी की मूर्ति या चित्र रखना चाहिए। पूजा के स्थान पर चार बत्तियों वाले दीपक को जलाकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। उसके बाद लाल फूल, रोली, अक्षत आदि से हनुमानजी की विधिवत पूजा करनी चाहिए। पूजन के बाद हनुमान चालिसा का पाठ करना चाहिए।
  3. भगवान हनुमान को प्रसन्न करने वाले इस व्रत के लिए उनके पसंद की वस्तुओं का इस्तेमाल किया जाता है।
  4. लाल फूल, तांबे के बरतन तथा नारियल की विशेष महत्ता है। हनुमान की मूर्ति या तस्वीर पर लाल फूल चढ़ाना चाहिए। तथा इस दिन लाल वस्त्र धारण करना चाहिए।
  5. हनुमान की पूजा करते समय उनके 21 नामों का उच्चारण करने का भी विधान है। वे नाम हैं- मंगल, भूमिपुत्र, ऋणहर्ता, धनप्रदा, स्थिरासन, महाकाय, सर्वकामार्थ साधक, लोहित, लोहिताज्ञ, सामगानंकृपाकर, धरात्मज, कुज, भौम, भूमिज, भूमिनंदन, अंगारक, यम, सर्वरोगहारक, वृष्टिकर्ता, पापहर्ता और पवन पुत्र। व्रत के दिन बजरंग वान का पाठ भी करना चाहिए ।

नमक रहित भोजन में गेंहू के आटे की रोटी गुड़ के साथ खाना चाहिए।

हनुमान जी को विशेष मंत्र के साथ अर्ध्य दिया जाना चाहिए। वह मंत्र है-

भूमिपुत्रो महातेजा: कुमारो रक्तवस्त्रक:।

गृहाणाघर्यं मया दत्तमृणशांतिं प्रयच्छ हे।

  1. कथा के साथ पूजा समाप्ति के बाद आरती और प्रसाद वितरण कर स्वयं प्रसाद ग्रहण करना चाहिए। हनुमानजी की बहुत ही प्रसिद्ध आरती है।

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रधुनाथ कला की।।

( लेखक- शंभु सुमन }

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