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मन की एकाग्रता बताती है मस्तिष्क रेखा

mind-line जीवन रेखा सामान्य स्वास्थ्य व शारीरिक गठन के बारे में बताती है। जबकि मस्तिष्क रेखा मानिसक स्वास्थ के बारे में बताती है। मस्तिष्क रेखा हाथ को दो भागों में बांटती है। ऊपरी भाग मानसिक स्वास्थ्य का सूचक होता है। निचला भाग भौतिक इच्छाओं को बताता है। यदि हाथ का ऊपरी हिस्सा अधिक विकसित हो तो जातक मानवीय मूल्यों को महत्व देता है। उसका रूझान बौद्धिकता की ओर होता है। यदि निचला भाग अधिक पुष्ट हो तो जातक जंगली और क्रूर होता है। उसकी इच्छाएं खाने-पीने और भोगविलास की ओर ही अधिक होती हैं।

मस्तिष्क रेखा मन की एकाग्रता बताती है। यह स्मरण शक्ति, तर्क-वितर्क की योग्यता, मस्तिष्क को चौकन्नापन तथा विचार और रुझान की स्वतंत्रता की घोतक होती है। मस्तिष्क रेखा जितनी गहरी होती है उतनी ही उपरोक्त विशेषताएं जातक में अधिक होती है। खराब बनावट की और टूटी-फूटी मस्तिष्क रेखा स्नायु व मस्तिष्क की क्षीणता की घोतक होती है।

छोटी-छोटी रेखाएं मस्तिष्क रेखा में से ह्रदय रेखा की ओर उठती हों तो ये रेखाएं तीन-चार से अधिक नहीं होनी चाहिए। ऐसे जातक में अच्छा-बुरा समझने की क्षमता होती है। यदि ऐसी ही छोटी-छोटी रेखाएं मस्तिष्क रेखा से निकलकर नीचे कलाई की ओर जाती हों तो वे मस्तिष्क को बलहीन बनाती हैं। ऐसा जातक मूर्ख होता है।

मस्तिष्क रेखा पर कोई अशुभ चिन्ह हो तो जातक के जीवन को आजीवन प्रभावित करता है। मस्तिष्क रेखा और जीवन रेखा बहुत दूर तक मिली हुई नहीं चलनी चाहिए। इससे मस्तिष्क रेखा की गुणवत्ता कम हो जाती है। जो मस्तिष्क रेखा चंद्र पर्वत पर ऊपर की ओर धीरे-धीरे घुमाव लेकर समाप्त होती है वह श्रेष्ठ होती है। जबकि बिना घुमाव के ही कोण बनाती हुई एक दम घूमकर नीचे के चंद्र पर्वत पर समाप्त होने वाली मस्तिष्क रेखा दूषित मानी जाती है।

लम्बी मस्तिष्क रेखा स्मरण-शक्ति और तर्क-वितर्क क्षमता की सूचक होती है। यदि मस्तिष्क रेखा सीधी होकर उर्ध्व मंगल पर जाए तो जातक पक्के सिद्धांत वाला, स्थिर विचारों वाला, व्यावहारिक और सामान्य ज्ञान का धनी होता है।

जो मस्तिष्क रेखा आरंभ से अंत तक एक जैसी न हो, लाल, काली, टूटी हुई, अचानक मुड़ी हुई, बहुत लंबी देर से आरंभ होने वाली और दोहरी दिखने वाली हो वह कमजोर, दोषपूर्ण और अशुभ मानी जाती है। यदि शनि पर्वत के नीचे कुछ अशुभ चिन्ह हों तो ये दोष बढ़ जाते हैं। अन्यथा अशुभ प्रभाव उपेक्षणीय ही होते हैं।

यदि जीवन-रेखा और मस्तिष्क रेखा आरंभ में दोषपूर्ण हों तो वे नाक, गले और साइनस के रोग सूचित करती है। यदि किसी स्त्री के हाथ में दोषपूर्ण मस्तिष्क रेखा के आयुखण्ड में भाग्य रेखा भी दोषपूर्ण हो तो उसके पति को बुरे दिन देखने पड़ते हैं।

यदि मस्तिष्क रेखा दोषपूर्ण हो, शुक्र पर्वत अति पुष्ट हो और जीवन रेखा सीधी हो तो ऐसे पुरुष में काम-क्रीड़ा के समय शीघ्र पतन की प्रवृत्ति होती है। काम-वासना के ही विचारों में डूबे रहने, सम्भोग की तीव्र इच्छा के कारण ऐसा होता है।

दोषपूर्ण मस्तिष्क रेखा वाले जातक प्राय: अस्थिर दिमाग वाले, धार्मिक, भावुक एवं सहानुभूति से परिपूर्ण होते हैं। दोषपूर्ण मस्तिष्क रेखा छोटी-छोटी आड़ी रेखाओं से कटी हुई हो तो जातक में स्मरण शक्ति कम होती है।, सिर में भारीपन रहता है। और आत्मविश्वास कम होता है। दोषपूर्ण मस्तिष्क रेखा वाले जातक प्राय: आलोचक और पीठ पीछे चुगली करने वाले होते हैं। वे आसानी से दूसरों पर विश्वास करने वाले, सीधे और मानवीय भावनायें लिये होते हैं।

शनि पर्वत के नीचे मस्तिष्क रेखा दोषपूर्ण हो तो जातक को बवासीर, घुटनों में दर्द, पांव की हड्डी में तरेड़ वात-विकार, भगन्दर मधुमेह व गर्भाशय के विकार होते हैं।

जो मस्तिष्क रेखा गुरु पर्वत से आरंभ होकर जीवन रेखा से जरा-सी दूर होकर चले वह जातक को महत्वाकांक्षी तो बनाती है, किंतु साथ ही साथ अधीर और जल्दबाज भी बना देती है। यदि मस्तिष्क रेखा गुरु पर्वत से चलकर सीधी चंद्र पर्वत की ओर जाये, जीवन रेखा को स्पर्श ही न करे, अंगूठा छोटा हो, वह ऊपरी सिरे पर चौड़ा और चपटा हो तो जातक झगड़ालू होता है।

जीवन रेखा और मस्तिष्क रेखा के बीच प्रारंभ में अधिक अन्तर हो तो जातक आवश्यकता से अधिक आत्मविश्वासी और उदंड होता है। जीवन रेखा और मस्तिष्क रेखा अपने उद्गम स्थान पर जुड़ी हुई हों और ह्रदय रेखा भी वहीं पर उनसे आ मिले तो आकस्मिक मृत्य का संकेत देती है।

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