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रहन-सहन

मंगलवार व्रत से दूर होता है अमंगल

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 मंगलवार को भगवान हनुमान का भी दिन माना गया है। ज्योतिष के अनुसार ग्रहों के अशुभ प्रभाव को खत्म करने के लिए पीड़ितों को उपवास और हनुमान की आराधना करने से मंगलकारी परिणाम मिलते हैं। अर्थात किसी व्यक्ति की कुंडली में कोई ग्रह अशुभ बना हुआ हो या किसी विशेष कार्य में बाधा आ रही हो, तो मंगलवार का विधि ...

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गर्मियों में छाछ के फायदे

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 गर्मी के दिनों में तेज धूप से बचना मुश्किल नहीं होता है। घर से या ऑफिस से निकलते हुए गर्म हवा और तेज़ धूप का सामना होना निश्चित है। ऐसे शरीर से ऊर्जा निकल जाती है। शरीर कमजोर पड़ जाता है, और अचानक तबीयत  बिगड़ जाती है। ऐसे में शारीरिक कमजोरी आने से चक्कर आना, उल्टी होना या फिर नाक ...

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प्रात: बिस्तर छोड़ने से पहले अपने हाथों को देखें

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 धर्मशास्त्रों ने प्रात: उठने से पहले मनुष्य के प्रथम कर्तव्य, प्रभु का स्मरण करना बताया है। प्रभु की कृपा से ही मनुष्य को यह अत्यंत दुर्लभ देह प्राप्त हुई है, जो समस्त सृष्टि के कण-कण में विद्यमान है, जिसकी कृपा से मनुष्य सब प्रकार के भय और कष्ट से मुक्त हो जाता है, प्रात: काल में भगवान के स्मरण से ...

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खूबियों से भरे हैं सप्ताह के सभी दिन

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 अंग्रेजी के महीने में सामान्यत: चार सप्ताहों के सभी सात दिनों पर नौ ग्रहों में से किसी न किसी का राज चलता है। जैसे रविवार पर सूर्य का सोमवार पर चंद्रमा का, मंगलवार पर मंगल एवं राहु का, बुधवार पर बुध का, बृहस्पतिवार पर गुरु का, शुक्रवार पर शुक्र और शनिवार पर शनि एवं केतु का अधिपत्य बना रहता है। ...

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कब और कैसे करें मंत्र साधना

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 सूर्योदय से प्राय: दो घंटे पहले ब्रह्ममूहुर्त्त साधक की सर्वांग उन्नति के लिये शुभ होता है। उस समय सोते रहना स्वास्थ्य व आर्थिक समृद्धि के विकास के लिये अशुभ है। अत: ब्रह्ममुहूर्त्त में उठकर अपने दोनों हाथों को देखें तथा भावना करें- कराग्रे वसते लक्ष्मी, करमध्ये सरस्वती। करमूले स्थितो ब्रह्मा, प्रभाते करदर्शनम्।।  नित्य कर्म से निपटकर कर  गणेश, सरस्वती, लक्ष्मी, ...

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गर्भाधान कब, क्यों और कैसे ?

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 प्रत्येक समाज, वर्ग एवं परिवार की किसी भी युवती का गर्भधारण उसके मन, शरीर एवं मस्तिष्क की स्वस्थता के साथ-साथ सामाजिक और पारिवारिक नैतिकता के अधार पर संस्कार-सम्मत माना जाता है। इनमें मानवीयता को सर्वोपरि स्थान दिया गया है, जिसका विचार विज्ञान और हिंदू धर्म ग्रंथों में बारीकी से बताया गया है। इसके अनुसार किसी भी लड़की को तब तक ...

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व्रत और उपवास क्यों ?

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 सभी तरह के पर्व-त्योहार में व्रत और उपवास का विशेष महत्व है। सामान्य तौर पर इन्हें एक ही समझा जाता है, जबकि इनके अर्थ और महत्व में विभिन्नता है। दोनों के अर्थ में बहुत ही थोड़ा सा फर्क है। व्रत में भोजन की बाध्यता नहीं है, जबकि उपवास में निराहार रहना आवश्यक होता है। किसी भी तरह के उपवास के ...

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प्रात: काल में जागरण क्यों ?

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 इस प्रश्न का वास्तविक उत्तर तो उसका आचरण करने पर ही मिल सकता है, क्योंकि किसी भी शंका का समाधान उसके उत्तर में प्रतिपादित तथ्यों की अनुभूति से ही- संभव है। इतना जान लेना चाहिए कि यह समय शारीरिक-स्वास्थ्य, बुद्धि, आत्मा मन आदि सभी की दृष्टि से निंद्रा छोड़कर जग जाने के लिए परम उपयुक्त है। इस समय प्रकृति मुक्तहस्त ...

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