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वास्तु शास्त्र

वास्तु की आठ दिशाएं

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 1. पूर्व दिशा- पहली दिशा ‘पूर्व दिशा’ है जहां से भगवान सूर्य उद्य होते हैं। आप जहां भी है वहां जिस दिशा से सूर्य की किरणे प्रात:काल उदय हो वह पूर्व दिशा कहीं जायेगी। इस दिशा को वास्तु शास्त्र में शुभ माना गया है। यहां तक की पूजा-प्रार्थना जैसे शुभ कार्य भी इस दिशा की तरफ मुख करके ही किये ...

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12 प्रकार के भूखण्डों का आकार व फल

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 भवन निर्माण से पूर्व हमें भूमि का परिक्षण करना चाहिए और भूखण्ड की आकृति पर विशेष ध्यान देना चाहिए। अपने आकार के अनुसार एक भूखण्ड शुभ-अशुभ फल दे सकता है। नीचे अलग-अलग भूमि के आकार एवं उनके फल दिए जा रहे है– 1.सूपाकार भूखण्ड जो भूखण्ड सूप के आकार का हो उसे सूपाकार भूखण्ड कहते हैं। सूपाकार भूखण्ड अशुभ एवं ...

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क्या आपका घर ईशान मुखी है ?

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 किसी भी मकान के मुख्य द्वार की स्थिति का सीधा संबंध उस घर में रहने वाले लोगों की सामाजिक, आर्थिक और मानसिक स्थिति से होता है।। इसलिए घर का मुख्य द्वार वास्तु दोष से मुक्त होना अत्यंत आवश्यक है। वास्तु शास्त्र में ईशानमुखी भवन का विषेश महत्व है। ईशान दिशा के प्रतिनिधि ग्रह बृहस्पति और स्वामी, भगवान शिव हैं। ईशानमुखी ...

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पूजा स्थल कहां और कैसे ?

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 घर का सपना सबसे अहम और महत्वपूर्ण होता है। सभी के लिए। अपना घर हो अथवा किराये का सभी अपने घर को सजाकर और संवार कर रखते हैं। और ऐसे में उनके लिए एक शोचनीय बात यह होती है कि अपने घर में भगवान के लिए कौन सा स्थान सही होगा। भगवान के लिए घर अर्थात पूजा घर या पूजा ...

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