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वैदिक ज्योतिष : वृषभ लग्न में 20 धन योग

वृषभ लग्न में धन योग1. वृषभ लग्न में बुध, मिथुन या कन्याराशि में हो तो व्यक्ति धनवान होता है।

2. वृषभ लग्न में, लग्न में चंद्रमा और मंगल साथ में हो तो जातक का 24 से 28 वर्ष की आयु में भाग्योदय होता है। ऐसा जातक अपने पराक्रम पुरुषार्थ से खूब धन कमाता है।

3. वृषभ लग्न में यदि बुध एवं बृहस्पति परस्पर परिवर्तन करके बैठे हों। अर्थात् बुध के घर में बृहस्पति एवं बृहस्पति के घर में बुध हो तो ऐसा व्यक्ति महाभाग्यशाली होता है तथा जीवन में अत्यधिक धन अर्जित करता है।

4. जन्म कुंडली में शनि, मकर, कुंभ या तुला राशि में हों तो जातक अल्प प्रयत्न से बहुत धन कमाता है। ऐसा व्यक्ति धन के मामले में भाग्यशाली होता है।

5. वृषभ लग्न हो, पंचम भाव में बुध हो तथा लाभस्थान मीन राशि में चंद्र, मंगल हो तो व्यक्ति महालक्ष्मीवान होता है।

6. वृषभ लग्न हो, लग्नेश शुक्र, धनेश बुध, भाग्येश शनि एवं लाभेश गुरु अपनी-अपनी उच्च या स्वराशियों में हो तो जातक करोड़पति होता है।

7. वृषभ लग्न में पंचम भाव में राहु, शुक्र, मंगल और शनि इन चार ग्रहों की युति हो तो जातक अरबपति होता है।

8. लग्न में शुक्र व मंगल हो और नवम में मकर का गुरु हो तो बुध व गुरु की दशा में जातक का भाग्योदय होगा।

9. शुक्र मिथुन का हो, बुध मीन का हो, गुरु धनु राषि में हो तो जातक को यकायक अर्थ की प्राप्ति होती है।

10. वृषभ लग्न में बुध पंचम भाव में हो, मीन का बृहस्पति लाभस्थान में चंद्रमा या मंगल के साथ हो तो ‘महालक्ष्मी योग’ बनता है। ऐसे जातक के पास अटूट लक्ष्मी होती है तथा अपने भुजबल से शत्रुओं का नाश करता हुआ राज्यलक्ष्मी को भोगता है।

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11. जन्म कुंडली में बुध एवं शनि परस्पर परिवर्तन योग करके बैठे हों अर्थात बुध, मकर या कुंभ राशि में हों तथा शनि, मिथुन या कन्या राशि में हो तो जातक अपने पुरुषार्थ एवं पराक्रम से धनवान बनता है तथा खूब धन कमाता है।

12. वृषभ लग्न में शुक्र लाभस्थान में तथा लाभेश गुरु लग्न स्थान में हो तो जातक 33 वर्ष में ही लाखों रुपये कमा लेता है तथा शत्रुओं का नाश करते हुए स्वअर्जित धनलक्ष्मी को भोगता है। ऐसे व्यक्ति को जीवन में अचानक रुपया मिलता है।

13. वृषभ लग्न हो, उसमें पूर्ण का चंद्रमा स्थित हो, कुंभ में शनि, सिंह में सूर्य, वृश्चिक में गुरु हो तो अधिक सम्पत्ति, वाहन व प्रभुता की प्राप्ति होती है।

14. जन्म कुंडली में मंगल यदि वृश्चिक या मकर राशि में हो तो ‘रूचक योग’  बनता है। ऐसा जातक राजा तुल्य ऐश्वर्य को भोगता हुआ अथाह भूमि, संपत्ति व धन का स्वामी होता है।

15. जन्म कुंडली में तृतीयेश चंद्र, लाभस्थान में एवं लाभेश गुरु,  तृतीये स्थान में परस्पर परिवर्तन करके बैठा हो तो ऐसे व्यक्ति को भाई, मित्र एवं भागीदारी से धन की प्राप्ति होती है।

16. वृषभ लग्न में सुखेश सूर्य, लाभेश गुरु यदि नवम भाव में हो तथा मंगल से दृष्ट हो तो व्यक्ति को अनायास धन की प्राप्ति होती है।

17. जन्म कुंडली में गुरु-चंद्र की युति मिथुन, सिंह, कन्या या मकर राशि में हो तो इस प्रकार के गजकेसरी योग के कारण व्यक्ति को अनायास उत्तम धन की प्राप्ति होती है। ऐसे व्यक्ति को लॉटरी, शेयर बाजार या अन्य व्यापारिक स्रोत से अकल्पनीय धन मिलता है।

18. वृषभ लग्न में यदि बलवान बुध की सूर्य से युति हो, पंचम भाव बृहस्पति से दृष्ट हो तो ऐसे व्यक्ति को पुत्र द्वारा धन की प्राप्ति होती है पुत्र जन्म लेने के बाद ही जातक का भाग्योदय होता है।

19. वृषभ लग्न में बलवान बुध की नवमेश शनि से युति हो तो ऐसा जातक राजा, राज्य सरकार, सरकारी अधिकारियों एवं ठेकेदारी से काफी धन कमाता है।

20. जन्म कुंडली में, लग्न में बलवान बुध की सप्तमेश मंगल से युति हो तो जातक का भाग्योदय विवाह के पश्चात होता है तथा उसे पत्नी, ससुरालपक्ष से धन की प्राप्ति होती है।

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