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वैदिक ज्योतिष : वृश्चिक लग्न में 20 धन योग

वैदिक ज्योतिष : वृश्चिक लग्न में 20 धन योग1. वृश्चिक लग्न में गुरु दूसरे भाव या पंचम भाव में अपनी ही राशि में हो अथवा भाग्य स्थान  में कर्क राशि (उच्च का) में हो तो ऐसे व्यक्ति को सदा धन प्राप्त होता रहता है। जीवन में धन का अभाव नहीं होता।

2. यदि यहां लग्नेश मंगल भाग्येश चंद्रमा के साथ आय भाव में हो और द्वितीयेश बृहस्पति पंचम भाव में अपनी ही राशि में हो तो ‘’महालक्ष्मी योग’’ बनता है। ऐसे व्यक्ति अखण्ड धन-संपत्ति प्राप्त करता है।

3. बृहस्पति पंचम भाव में और बुध 11वें भाव में उच्च के हों तो ऐसा व्यक्ति अपने साहस व पराक्रम से खूब धन-संपत्ति पाता है।

4. जन्मपत्री में द्वितीयेश व आयेश यदि परस्पर स्थान परिवर्तन करें अर्थात यहां द्वितीयेश गुरु 11वें भाव में और 11वें भाव के स्वामी बुध दूसरे भाव में जाये तो भी व्यक्ति धनवान व भाग्यशाली होता है।

5. आय भाव में बृहस्पति यदि बुध व शुक्र के साथ युति बनायें अथवा दृष्ट हों तो व्यक्ति राजा की तरह धन, ऐश्वर्य व भौतिक सुखों को पाता है।

6. जब लग्नेश, धनेश, भाग्येश और दशमेश अर्थात मंगल, गुरु, चंद्रमा व सूर्य यदि सभी ग्रह वृश्चिक लग्न में उच्च के हैं अथवा अपनी-अपनी स्वराशि में हैं तो महालक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

7. वृश्चिक लग्न में सूर्य दशम भाव का स्वामी है, यदि यहां सूर्य, गुरु के साथ युति बनाये तो पैतृक संपत्ति प्राप्त होती है। पिता द्वारा संचित धन, संपत्ति उसे प्राप्त होगी। पिता के व्यवसाय में ऐसे व्यक्तियों को लाभ होता है।

8. जब चंद्रमा वृष राशि अथवा स्वराशि (कर्क) में हो तो थोड़े प्रयत्न से ही अधिक लाभ मिलता है। व्यक्ति थोड़े परिश्रम से ही उससे अधिक धन प्राप्त करता है।

9. वृश्चिक लग्न में यदि लग्नेश और आयेश परस्पर स्थान परिवर्तन करें तो व्यक्ति अपने बल व सामर्थ से ही धन कमाता है। ऐसा व्यक्ति भाग्यवान है। 33 वर्ष के बाद भाग्य साथ देता है।

10. वृश्चिक लग्न में यदि लग्नेश मंगल, आयेश बुध, सप्तमेश व व्ययेश शुक्र और तृतीयेश व चतुर्थेश शनि ये सभी ग्रह लग्न में आ जायें तो व्यक्ति करोड़पति होता है। उसके जीवन में काफी धन, समृद्धि आती है।

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11. वृश्चिक लग्न में मंगल यदि लग्न में ही हो तो “रूचक योग” बनता हैं। ऐसा व्यक्ति भूमि से संबंधित कार्यों में अखण्ड धन प्राप्त करता है।

12. वृश्चिक लग्न में यदि लग्नेश मंगल, आयेश बुध, सप्तमेश व व्ययेश शुक्र और तृतीयेश व चतुर्थेश शनि ये सभी ग्रह 11वें भाव में हो और साथ में राहु भी हो तो व्यक्ति अरबपति होता है।

13. जन्मपत्री में ‘’गजकेसरी योग’’ (गुरु + चंद्र एक साथ) धनु, कुंभ, मीन या कर्क राशि में हो तो अचानक अकल्पनीय धन की प्राप्ति होती है। ऐसे व्यक्तियों को शेयर बाजार लॉटरी, अचानक धन प्राप्ति के साधनों से विशेष लाभ होता है।

14. वृश्चिक लग्न में तृतीयेश और आयेश यदि परस्पर स्थान परिवर्तन करें तो ऐसे में भाई बहन मित्रों से विशेष लाभ होता है। भाइयों से, मित्रों से आर्थिक सहायता मिलती है।

15. गुरु लग्न में हो, आयेश बुध केंद्र में चंद्रमा के साथ युत हो तो व्यक्ति धनवान होता है। गुरु सदा आर्थिक स्थिति यहां सुदृढ़ रखता है।

16. गुरु और बुध पंचम भाव में हों और चंद्रमा 11वें भाव में हो तो यह व्यक्ति करोड़ों रुपयों का स्वामी बनाता है।

17. लग्नेश मंगल दूसरे भाव में हो या गुरु, बुध, मंगल आय स्थान में हो तो गुप्त रूप से धन की प्राप्ति होती है।

18. यदि पंचमेश गुरु पंचम भाव में ही स्थित है और शुभ ग्रहों की दृष्टि (शुक्र, चंद्र, बुध) से पल्लवित है तो संतान बहुत भाग्यशाली होगी। पुत्र द्वारा घर में आर्थिक समृद्धि व लाभ प्राप्त होगा।

19. वृश्चिक लग्न में यदि गुरु व शुक्र का संबंध हो विशेषकर इनकी युति होने पर शादी के बाद आर्थिक सफलता प्राप्त होती है। पत्नी व ससुराल पक्ष से लाभ होता है।

20. यहां धनकारक बृहस्पति छठे भाव के स्वामी मंगल के साथ युति बनाये और दूसरे भाव पर शनि की दृष्टि हो तो ऐसा व्यक्ति शत्रुओं को पराजय कर उन पर विजय प्राप्त कर धन प्राप्त करता है।

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