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विश्व के 11 मस्जिद : जो सर्वाधिक लोकप्रिय है

विश्व के 11 मस्जिद : जो सर्वाधिक लोकप्रिय हैमस्जिद वह पवित्र स्थल होता है जहाँ मुसलमान अल्लाह की इबादत करते हैं। अपने दुःख सुख बाँटते  हैं। दूसरों के लिये दुआएं करते हैं। मस्जिद शब्द अरब से आया है। मस्जिद मुसलमानों के लिए पृथ्वी का सबसे पवित्र स्थल होता है। वे वहां बैठकर अल्लाहताला की इबादत करते हैं। मुसलमान भाई मस्जिद में इस्लाम की शिक्षा और विभिन्न विषयों पर चर्चा भी करते हैं।

ब्रिटेन (यूनाइटेड किंगडम) में मस्जिद को सामुदायिक केंद्र के रूप में भी इस्तेमाल किया  जाता है। वहां इस्लाम की शिक्षा दी जाती है। जहां इस्लाम के धार्मिक त्योहारों पर अल्लाह की इबादत करने हज़ारों की संख्या में लोग आते हैं। बहुत सी मस्जिदें अपने इस्लामिक रीति—रिवाज  के ढांचे की वजह से आकर्षण का केंद्र बनती हैं। दुनिया में बहुत सारी मस्जिदें हैं, कुछ ख़ूबसूरत मस्जिदों का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है। मस्जिद अल-हरम1.  मस्जिद अल-हरम  ( AL HARAM MOSQUE ) :मस्जिद अल-हरम  इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल काबा को पूरी तरह घेरने वाली एक मस्जिद है। कुरान में अल्लाह ने लिखा है कि काबा ही इबादत करने का पहला केंद्र है। अगर अन्दर-बाहर की नमाज़ पढ़ने की पूरी जगह को देखा जाए तो मस्जिद के वर्तमान ढांचे का क्षेत्रफल ३,५६,८०० मीटर है (यानि ८८.२ एकड़)।   इस मस्जिद में एक साथ 80 लाख लोग आ सकते हैं. अल हराम मस्जिद सऊदी अरब में है। यह दुनिया की सबसे बड़ी मस्जिद है। यह काबा के पवित्र स्थानों में से एक है। इस्लामिक नियमों के अनुसार प्रत्येक मुसलमान को ज़िन्दगी में एक बार हज की यात्रा ज़रूर करनी चाहिए। इस यात्रा में काबा के सात चक्कर घड़ी की विपरीत दिशा में लगाने होते हैं। यही प्रक्रिया हज यात्रियों को उमराह के दौरान भी करनी होती है।

अल मस्जिद अन नबावी 2. अल मस्जिद अन नबावी (AL– MASJID AN NABAWI ): अल मस्जिद अन नबावी मदीना में स्थित है। यह मस्जिद स्वयं मुहम्मद ने अपने घर के पास बनवाई थी। वहीं उनकी कब्र भी बनवाई गई। यह इस्लाम का दूसरा पाक स्थल है। यह मस्जिद अल हराम के बाद दुनिया की सबसे बड़ी मस्जिद है। इस मस्जिद में मुहम्मद की कब्र है।  इस मस्जिद के तीन दरवाज़े हैं। पहला दक्षिण में बाब रहमान, दूसरा बाब जिबरील पश्चिम मे और बाब अल निसा पूर्व में है।

अल अक्सा मस्जिद 3. अल अक्सा मस्जिद ( AL AQSA MOSQUE ) : अल अक्सा मस्जिद दुनिया का तीसरा बड़ा इस्लामिक स्थल है।  यह जेरुशलम में स्थित है। ऐसा माना जाता है कि इस मस्जिद का एक हिस्सा यहूदी धर्म का पूजनीय स्थल था। हालाँकि यह विवाद का मुद्दा है। यह मस्जिद 144,000 मीटर और 35 एकड़ में बनी है। इसे अल हराम और अल शरीफ के नाम से भी जाना जाता है। इस मस्जिद का गुम्बद आकर्षण का केंद्र है। हसन मस्जिद द्वितीय4. हसन मस्जिद द्वितीय (HASSAN II MOSQUE ) : हसन  मस्जिद मोर्रक्को में स्थित है। यह देश की सबसे बड़ी मस्जिद और दुनिया की सातवीं सबसे बड़ी मस्जिदों में शुमार है। यह दुनिया की सबसे ऊंची मीनार है। यह 1993 में बनवाई गई। इसका ढांचा मिशेल पिंसीयूई और  निर्माण बोयगस ने करवाया था। इस मस्जिद की खासियत यह है कि यह मस्जिद मक्का की तरफ से आने वाली रौशनी की दिशा की तरफ मुंह करके बनाई गई है। इस मीनार से अटलांटिक महासागर का सुन्दर दृश्य दिखाई देता है।  मस्जिद की दीवारें मारबल से बनाई गई है। 105 हजार से ज़्यादा मुसलमान यहाँ इबादत करने के लिए इकठ्ठा होते हैं। सुल्तान उमर अली सैफुद्दीन मस्जिद5. सुल्तान उमर अली सैफुद्दीन मस्जिद (SULTAN OMAR SAIFUDDIN MOSQUE ) : सुलतान उमर अली  मस्जिद,  बन्दर सेरी बेगवान में स्थित शानदार मस्जिद है।  इस मस्जिद का नाम सुल्तान हसैनिल बोल्किया के पिता सुल्तान ओमर अली सैफुद्दीन तृतीय की मृत्य के बाद रखा गया। यह मस्जिद ब्रूनेई की भव्य इमारतों में से एक है। यह पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। मस्जिद 1958 में बनकर तैयार हुई। यह मस्जिद आधुनिक इस्लामिक वास्तुकला का एक सफल उदाहरण है। इस मस्जिद का प्रमुख गुम्बद सोने का बना है। इस मस्जिद में 3000 लोग नमाज़ करने आते हैं। मस्जिद पर भव्य नक्काशी की गई है। ज़हीर मस्जिद6. ज़हीर मस्जिद (ZAHIR MOSQUE) : ज़हीर मस्जिद मलेशिया में स्थित है।  यह मलेशिया की सबसे बड़ी और सबसे पुरानी मस्जिद है। मस्जिद 1912 में बनकर तैयार हुई। इसका वित्तपोषण सुलतान तज्जुदीन मुकर्रम शाह के बेटे तुंकु महमूद ने किया था। इसका डिज़ाइन स्वर्गीय सुलतान मुहम्मद जिबा ज़ैनल अबिदीन द्वितीय से प्रेरित था। इस मस्जिद पर बने काले रंग के पांच बड़े गुम्बद इस्लाम के पांच पिलर माने जाते हैं। फैसल मस्जिद7.  फैसल मस्जिद (FAISAL MOSQUE) : यह मस्जिद इस्लामाबाद में स्थित है। यह एशिया के उत्तर और दक्षिण में फैली है और दुनिया की चौथी बड़ी मस्जिद है। इस मस्जिद के शिल्पकार टर्की के वेदात डालोके थे। वेदात डालोके का यह  डिज़ाइन 1969 में अंतरराष्ट्रीय  प्रतियोगिता के तहत चुना गया था। यह मस्जिद 1986 में बनकर तैयार हुई। मस्जिद मार्गला पहाड़ी पर बनी है। पहाड़ी पर बने होने के कारण मस्जिद में दिन रात लोगो का तांता लगा रहता है। यह मस्जिद आधुनिक शिल्पकला का उदहारण है। इस मस्जिद में गुम्बद नहीं है। यही कारण है कि यह मस्जिद दुनिया में विलक्षण संरचना है। इसके प्रार्थना स्थल में 10,000 श्रद्धालू  एकत्र होते हैं।

ताज उल मस्जिद 8. ताज उल मस्जिद (TAJ UL MOSQUE): ताज उल मस्जिद ‘मस्जिदों का ताज’ मानी जाती है। यह मस्जिद एशिया की बड़ी मस्जिदों में से एक है और यह मस्जिद भोपाल में स्थित है। इसे ‘अल्लाह की मस्जिद’ भी कहा जाता है। मस्जिद का इस्तेमाल एक स्कूल के रूप में  इस्लाम की शिक्षा देने के लिए भी किया जाता है। इस मस्जिद का गृह-मुख गुलाबी है। इसमें 18 मंजिलें हैं। यह मार्बल से बनाई गई है। इस मस्जिद का निर्माण भोपाल की सुल्तान शाह जेहन  बेग़म(1868-1901) ने शुरू किया और 1971 में अल्लमा मोहम्मद इमरान खान नदवी अजहरी के प्रयासों से पूरा हुआ। बादशाही मस्जिद9. बादशाही मस्जिद (BADSHAHI MOSQUE ) :  मुग़ल वंश के छठे शाषक औरंगज़ेब ने इस मस्जिद की नींव रखी। इसका निर्माण 1671 में शुरू हुआ और 1673 में पूरा हुआ। यह पकिस्तान और दक्षिण एशिया की दूसरी सबसे बड़ी मस्जिद है। और दुनिया में पांचवी बड़ी मस्जिद है। यह बेहद सुंदर, रमणीय और मुग़ल साम्राज्य की उपलब्धियों की पहचान है। यह मस्जिद लाहौर में स्थित है।

सुल्तान मस्जिद 10. सुल्तान मस्जिद (SULTAN MOSQUE ) : सुल्तान मस्जिद सिंगापुर की सबसे महत्वपूर्ण मस्जिदों में से एक है। इसे मस्जिद सुल्तान भी कहा जाता है। इसका नाम सुल्तान हुसैन शाह के नाम पर रखा गया। इसका निर्माण पहली बार 1820 में हुआ और जब एक सदी बाद इस मस्जिद की मीनार ढह गई तब इसका दुबारा निर्माण शुरू हुआ और  1932 में पूरा हुआ। यह मस्जिद मुसलमानों के लिए बहुत मायने रखती है। इसे सिंगापुर की राष्ट्रीय मस्जिद माना जाता है। इस मस्जिद का सबसे सुन्दर दृश्य  इसके पूर्व और पश्चिम के गृह-मुख के ऊपर बनीं प्याज की आकृति के दो गुम्बद हैं। यह गुम्बद अर्थचंद्रमा के समान दिखाई देते हैं। द कॉल शरीफ11. द कॉल शरीफ (THE KOL SHARIF) : द कॉल शरीफ मस्जिद काजन क्रेमलिन में स्थित है। यह मस्जिद रशिया में सबसे बड़ी मस्जिद है इसलिए अपने निर्माण काल से ही विख्यात थी। मस्जिद का निर्माण 16वीं शताब्दी में काजन क्रेमलिन द्वारा हुआ। इसका नाम कॉल्स शरीफ की मृत्यु के बाद रखा गया। कॉल्स शरीफ की मृत्य 1552 में काजन  को रशियन फ़ोर्स से बचाने में हो गई थी। लोगो का ऐसा मानना है कि किसी समय पर यह मस्जिद गुम्बद और तंबू दोनों की रूपरेखा लिए हुए थी। इसका डिज़ाइन बोल्गा बुल्गारिया के लिए बनाया गया था।