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नियमित रूप से अलसी खाने के 15 फायदे

नियमित रूप से अलसी खाने के 15 फायदेसामान्यतः मांसाहारी खाद्य पदार्थों में पाया जाने वाला फैटी एसिड ओमोगा-3 की प्रचूरता वाले अलसी को तीसी, कॉमन फ्लेक्स और अतसी भी कहा जाता है। यह शरीर को ऊर्जा, स्फूर्ति और जीवटता प्रदान करने वाला असरकारी गुणों से भरपूर खाद्य पदार्थ है।   कई रोगों के लिए लाभकारी है, जिसके कुछ महत्वपूर्ण औषधीय उपयोग इस प्रकार के हैंः-

  1. आयुर्वेद के अनुसार अलसी में गले एवं छाती के दर्द, पसलियों में दर्द, जोड़ों की सूजन, निमोनिया, चोट, मोच शरीर के किसी अंग में गांठ या फोड़ा आदि के लिए उपयोगी है। चरक संहिता के अनुसार यह जीवणु नाशक है तथा श्वांस नलियों और फेफड़े में जमे कफ को निकाल दमा और खांसी में राहत देता है।
  2. यह पथरी, पेशाब में शर्करा और तकलीफदेह पेशाब होने की स्थिति में गुणकारी है। इसकी छोटी सी मात्रा में ही गुर्दे को उत्तेजित करने की क्षमता है, जो पेशाब निष्कासन में लाभकारी है। इसके काढ़े से एनिमा देकर मलाशय की शुद्धि की जाती है, जबकि पेट रोगों में इसका तेल फायदा करता है।
  3. तनाव या अवसाद की स्थिति में अलसी का सेवन स्थिरता और शांति प्रदान करता है। इसमें कैंसररोधी हार्मोंस की सक्रियता बढ़ाने की क्षमता है तथा 27 किस्म के कैंसररोधी रसायन खोजे जा चुके हैं। कई शोधों से साबित हुआ है कि इससे दिल की बीमारी, कैंसर, स्ट्रोक और मधुमेह की आशंका खत्म हो जाती है। साथ ही यह रक्त में कोलेस्ट्राॅल की मात्रा को भी कम करता है।
  4. अलसी आज के दौर की स्त्रियों में बांझपन, गर्भपात, दुग्ध की कमी जैसी समस्याओं से निपटने में मददगार बन सकता है, तो यह यौन-इच्छा, कामोत्तेजना और चरमआनंद संबंधी विकार को भी दूर करता है। यह कहें कि स्त्रियों की सभी यौन संबंधी समस्याओं के समधान के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है, क्योंकि इसमें इसकी जरूरतें पूरी करने वाले तमाम रसायनों के घटक मौजूद हैं।
  5. अलसी न केवल बांझपन दूर करता है, बल्कि इसमें पुरुषहीनता, शीघ्रस्खलन और स्तंभन दोष दूर करने के रसायन भी पाए जाते हैं। इसमें पाया जाने वाला आमेगा-3 फैट के अलावा सेलेनियम और जिंक प्रोस्टेट के रखरखाव, स्खलन पर नियंत्रण, टेस्टोस्टिरोन और शुक्राणुओं के निमार्ण के लिए बहुत ही उपयोगी है। यह जहां स्त्रियों को रति बनाने में सहायक है तो पुरुष को कामदेव बना सकता है।
  6. मधुमेह के रोगी को प्रतिदिन 30 से 50 ग्राम अलसी के सेवन की सलाह दी गई है। वैसे इसकी औसत मात्रा 30 ग्राम को माना गया है। उपयोग के लिए अलसी को मिक्सी के ड्राई ग्राइंडर में पीसकर उसे गेंहू के आटे में मिला दें। उससे बनी रोटी या परांठा सुबह-शाम खाने से लाभ मिलता होता है।
  7. अलसी में चूंकी कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक और शक्कर की मात्रा नगण्य होती है इसलिए इसकी बनी रोटी मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद है। इसे आटे में मिलाकर पकाई गई रोटी या परांठे का सेवन करने से स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
  8. कैंसर के मरीजों के लिए अलसी के बने व्यंजनों का सेवन करना चाहिए। जैसे इससे ब्रेड, कुकीज, आइसक्रीम, चटनी, लड्डू आदि बनाए जा सकते हैं।
  9. अलसी को धीमी आंच पर हल्का भूनकर उसे मिक्सर में पीस लिया जाता है। इस तरह से तैयार चूर्ण को कुछ दिनों तक इस्तेमाल के लिए एयर टाइट डिब्बे में रखा जाता है। इस चूर्ण को प्रतिदिन सुबह-शाम एक चम्मच लेने से कई रोगों से बचा जा सकता है। ध्यान रहे चूर्ण सेवन के बाद कम से कम दो ग्लास हल्का गर्म पानी पीना आवश्यक है। अलसी के चूर्ण को एक सप्ताह से अधिक समय तक बनाकर नहीं रखें, यह चूर्ण जल्द खराब होने लगता है।
  10. विभिन्न प्रकार के कैंसर, जैसे ब्रेस्ट कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर और कोलोन कैंसर से बचाव के लिए अलसी का उपयोग इसमें पाए जाने वाले रसायन लिग्न के कारण किया जाता है। यह हार्मोन के प्रति काफी संवेदनशील होता है और ब्रेस्ट कैंसर से निजात दिलाने में फायदेमंद साबित होता है।
  11. भूने हुए अलसी से बने चूर्ण को फलों के रस में मिलाकर भी लिया जा सकता है। इसके लिए एक गिलास जूस यानि 150 मिलीलीटर में एक चम्मच अलसी के चूर्ण को मिला लें। इससे जूस और भी स्वादाष्टि बन जाता है।
  12. दही या रायते में अलसी को मिलाने से उसका स्वाद और भी अच्छा हो जाता है। अलसी का रायता बनाने के लिए सामग्री के तौर पर एक कप कसी हुई लौकी, एक कप दही और आधी चम्मच मोटी पीसी हुई हल्की भूनी अलसी, आधा चम्मच काला नमक और थोड़ी सी चीनी लें। इन सबको एक कटोरे में मिलाकर एक घंटे तक ठंडा होने पर सेवन करें।
  13. अलसी का सेवन चाय के तौर पर भी किया जा सकता है। इसे बनाने के लिए एक चम्मच बगैर भूनी हुई अलसी के चूर्ण को करीब दो कप पानी (360 मिली) में तबतक उबाला जाना चाहिए जबतक कि पानी एक कप न बच जाए। उसे ठंडा होने पर उसमें थोड़ा शहद, गुड़ या शक्कर मिलाकर चाय के चुस्की की तरह पीना चाहिए। इसका लाभ दमा, खांसी, सर्दी, जुकाम आदि में मिलता है। सर्दी में इस चाय का सेवन दिन में दो-तीन बार किया जाना चाहिए।
  14. अलसी को स्वास्थ्य और स्वाद के लिए नियमित आहार में शामिल करने के लिए सलाद अच्छा जरिया बन सकता है। इससे सलाद को एक अलग तरह का फ्लेवर मिल जाता है। इसके लिए सलाद के ऊपर एक चम्मच भूनी हुई अलसी का चूर्ण छिड़क दें। इसी तरह से सब्जी की ग्रेवी में भी अलसी के चूर्ण को मिलाकर व्यंजन को अलग स्वाद दिया जा सकता है।
  15. विभिन्न रोगों में अलसी का सेवन अगर लाभकारी है तो इसकी अधिक मात्रा में सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी साबित हो सकता है। आहार विशेषज्ञों के अनुसार इसकी मात्रा प्रति दो चम्मच से अधिक नहीं होनी चाहिए। जो 30 से 60 ग्राम तक प्रतिदिन होनी चाहिए।   ( शम्भु सुमन )