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विश्व के 12 सर्वाधिक लोकप्रिय गुरुद्वारे

विश्व के 12 सर्वाधिक लोकप्रिय गुरुद्वारेभारत में 15वीं शताब्दी में एक ऐसा धर्म स्थापित हुआ जो बराबरी, बहादुरी और उदारता सिखाता है, वह सिक्ख धर्म है। इस धर्म को भारत में सिक्खों के गुरु, गुरु नानक 15 वीं शताब्दी में लाये। गुरुद्वारा एक धार्मिक स्थल होता है। गुरुद्वारा शब्द गुरु और द्वारा से बना है जिसका अर्थ है गुरु का द्वार। गुरुद्वारे हर धर्म के लोगों के लिए खुला होता है। इस धर्म का उद्देश्य व्यक्ति को आंतरिक शांति देना और एक पवित्र आत्मा बनाना है। इस धर्म में सभी गुरुद्वारे में ‘गुरु ग्रंथ साहिब जी’ किताब रखी गई है। यह किताब गुरुनानक की वाणी को संजोने वाली है। यह किताब गुरूद्वारे के गुरु के सामने रखी जाती है। सिक्खिज़्म और गुरुद्वारा की उत्पत्ति पंजाब के अमृतसर से हुई। पंजाब से शुरुआत होकर आज हम देखते हैं की पूरी दुनिया भर में हज़ारों गुरुद्वारे हैं जो सिक्ख धर्म की शिक्षा देते हैं और भक्तगण वहां आकर गुरु को याद करते हैं। गुरुद्वारा एक ऐसा स्थान होता है जहाँ शांति मिलती है। इंसान जब बहुत दुखी और हताश होता है तो शांति चाहता है। और वो शांति व्यक्ति को गुरूद्वारे में मिलती हैं। दुनिया में अनेक गुरूद्वारे हैं लेकिन यहाँ सर्वाधिक लोकप्रिय  गुरुद्वारे के बारे में बताया जा रहा है।

श्री हरमिंदर साहिब

1 . श्री हरमिंदर साहिब

यह गुरुद्वारा अमृतसर में स्थित है। इसे गोल्डन टेम्पल भी कहते हैं। यह गुरुद्वारा केवल सिक्खों का मुख्य केंद्र ही नहीं है बल्कि भाईचारा और समानता का प्रतीक भी है। गुरुद्वारे में सभी लिंग, जाति और धर्म के लोग आते हैं और यहाँ सभी को धार्मिक सांत्वना मिलती है। गुरु अमर दास जी (तीसरे गुरु) और श्री गुरु राम दास जी(चौथे गुरु) की सलाह पर अमृत सरोवर की खुदाई शुरू हुई। सरोवर श्री हरमिंदर साहिब के लिए 1577 ईसवीं में बनवाई गई। इसके बाद 1588 में श्री गुरु अर्जन देव जी(सिखों के पांचवें गुरु) ने सरोवर में ईंटें बिछवाई । अर्जन देव जी के प्रयास से इसी समय हरमिंदर साहिब गुरूद्वारे का निर्माण भी शुरू हो गया। “श्री ‘गुरु ग्रन्थ साहिब”’ ग्रन्थ सबसे पहले 1604 ईसवीं में श्री हरमिंदर साहिब गुरुद्वारा में ही स्थापित किया गया था। इस गुरूद्वारे के पहले प्रमुख बाबा बुद्धा बनें। श्री हरमिंदर साहिब की शिल्पकला अनोखी है। गुरुद्वारा हमें समानता और इंसानियत का पाठ पढ़ाता है। इसके चार प्रवेश द्वार यह दर्शाते है कि सभी दरवाजे सभी के लिए बराबर खुले हैं। Read Also : भारतीय समाज : नववधू के सोलह श्रृंगार

गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब2.  गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब

गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब उत्तर भारत के  हिमालय की श्रृंखला  पर स्थित है। यह समुद्र तल से 15 हज़ार फ़ीट ऊपर है। श्री हेमकुंड साहिब एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थान के रूप में लोकप्रिय हो गया है। गर्मियों के मौसम में यहाँ हज़ारों भक्तगण पूरी दुनिया से आते हैं। ऐसा माना जाता है कि सिक्खों के दसवें  गुरु, गुरु गोबिंद सिंह की आत्मकथा ‘बचित्रा नाटक’ के अनुसार  गुरु गोबिंद अपने पिछले जन्म में  ‘सात बर्फ से सजी चोटी’ पर ध्यान लगाते थे। गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपनी आत्मकथा में उस ‘ध्यान’  करने वाले स्थान का ज़िक्र किया है। बहुत से सिक्ख सैनिको ने उस स्थान को ढूंढने की कोशिश की जिसमे  सोहन सिंह, हावैदर मोन सिंह, संत ठंडी सिंह और संत सूरत सिंह जैसे संतो को महान कहा गया।  इन सभी गुरुओं के अथक प्रयासों से हेमकुंड साहिब का निर्माण किया था। गुरुद्वारा श्री केशगड साहिब

3 . गुरुद्वारा श्री केशगड साहिब

गुरुद्वारा श्री केशगड़ साहिब आनंदपुर साहिब  सिटी के केंद्र में स्थित है। इसे तख़्त श्री केशगड़ साहिब भी बोलते हैं। यह शहर सिक्खों के नौंवें गुरु, गुरु तेग बहादुर जी ने खोजा था। आज इस स्थान को कई गुरुद्वारों का घर मानते हैं। इस गुरुद्वारे की महत्ता इसमें पांच तख़्त और एक गद्दी विशेष व्यक्ति के लिए होती है। इसकी आधारशिला 30 मार्च 1689 में पड़ी।

गुरुद्वारा बंगला साहिब

4 . गुरुद्वारा बंगला साहिब

गुरुद्वारा बंगला साहिब दिल्ली के दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस में स्थित है। यह अशोक रोड और बाबा खड्ग सिंह मार्ग के बीच में स्थित है। यह गुरुद्वारा मिर्ज़ा राजा जय सिंह की हवेली थी जिसे बाद में बंगला साहिब कहा जाने लगा। बंगला का अर्थ है महल। 1664 में सिक्खों के आठवें गुरु, गुरु हरिकृष्ण साहिब जी जब दिल्ली आते थे तब राजा जय सिंह के महल में ठहरते थे। इन्होंने स्मॉल पॉक्स, चिकन पॉक्स और कालरा जैसी बीमारियों का इलाज उस समय बताया जब यह संक्रामक रोग की तरह पानी में  फैल रहा था। उसी पानी को आज सरोवर के नाम से जाना जाता है। यह सरोवर गुरुद्वारे में केंद्र में है। इस सरोवर में नहाकर लोग अपने शरीर और मन की गन्दगी की सफाई करते हैं। इसी गुरुद्वारे में एक संग्रहालय भी है जो  सिक्खों के इतिहास को बताता है। Read Also : आपका भाग्य कहीं बंधा तो नहीं है ?

गुरुद्वारा बेर साहिब

5 . गुरुद्वारा बेर साहिब

गुरुद्वारा बेर साहिब पंजाब के जिला कपूरथला में स्थित है। यह जालंधर से 36 और अमृतसर से 60 किलोमीटर दूर स्थित है। सिक्खों के सभी पूजास्थलों में से यह गुरुद्वारा अधिक महत्वपूर्ण है। क्योंकि यह गुरु नानक देव जी से जुड़ा हुआ है। लोगो का ऐसा विश्वास है कि गुरुनानक जी को इसी स्थान पर ज्ञान की प्राप्ति हुई होगी और तभी उन्होंने सुखमनी साहिब की रचना लिखी। एक बार गुरु नानक नहाने के लिये नदी में गए और उसमें से वापस नहीं आये। तीन  दिन बाद गुरु नानक  ईश्वरीय शक्ति के साथ नदी से बाहर निकले। उसी ईश्वरीय शक्ति को फैलाने के लिए गुरु नानक ने सिक्ख धर्म की स्थापना की। गुरु नानक देव ने उस स्थान पर बेर का पेड़ लगाया। गुरुनानक देव द्वारा डाले गए एक बीज को आज एक वृक्ष के रूप में देख सकते हैं।

गुरुद्वारा मणिकर्ण साहिब

6 . गुरुद्वारा मणिकर्ण  साहिब

गुरुद्वारा मणिकर्ण साहिब हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों में स्थित हैं यह भूँतार से 40 किलोमीटर दूर है। गुरुद्वारा मणिकर्ण साहिब मनाली की पहाड़ियों के बीच पड़ता है। जिससे इसकी सुंदरता और बढ़ जाती है। ऐतिहासिक रूप से भी इस गुरुद्वारे की  महत्ता ज़्यादा बढ़ जाती है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि 1574 में गुरु नानक देव जी  अपने शिष्य मर्दाना भाई और  भाई बाला के साथ यहाँ आये थे। यह स्थान गुरु नानक देव का ध्यान स्थान रहा और वहीँ उन्होंने कुछ अचंभित करने वाले कारनामे भी किये। Read Also : रविवार व्रत से सर्व मनोकामना पूर्ण होती है

गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा

7 . गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा

गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा लन्दन में स्थित है।यह लन्दन में सबसे बड़ा सिक्ख मंदिर है। यह गुरुद्वारा 2003 में बनाया गया था। वे अप्रवासी  भारतीय जो 50 और 60 के दशक में भारत छोड़कर इंग्लैंड में बस गए थे, उन्होंने इस गुरूद्वारे का निर्माण करवाया। इंग्लैंड में इस गुरूद्वारे को बनाने के पीछे एक कारण यह भी था कि इंग्लैंड के सिक्खों में सिक्ख धर्म को ख़त्म ना होने दिया जाये। यूरोप में स्थित इस गुरुद्वारे की बिल्डिंग सबसे बड़ी है और यह मार्बल व ग्रेनाइट का बना हुआ है। इसकी पहली मंजिल पर 3000 श्रद्धालु पूजा करने आते है और दूसरे वाले फ्लोर पर सामुदायिक केंद्र, पुस्तकालय और डाइनिंग रूम है।

तख़्त श्री पटना साहिब

8 . तख़्त श्री पटना साहिब

तख़्त श्री पटना साहिब गुरुद्वारा भारत के बिहार में स्थित है। इस स्थान को सिक्खों के दसवें गुरु , गुरु गोबिंद सिंह जी के जन्मस्थान के रूप में याद किया जाता है। इस गुरूद्वारे का निर्माण महाराजा रणजीत सिंह जी  (1780-1893) ने किया था। ये सिक्ख संप्रदाय के महाराजा थे। इन्होंने केवल भारत में ही नहीं बल्कि पाकिस्तान में भी  कई गुरूद्वारे खुलवाये। गुरुद्वारा पटना साहिब का निर्माण पश्चिम में सिक्ख धर्म को फैलाने के लिए किया। इतिहास में तख़्त श्री पटना साहिब को दूसरा सबसे महत्वपूर्ण तख़्त मानते हैं। पटना साहिब में  सिक्खों के दसवें गुरु के अवशेष भी रखे गए हैं। इसमें एक झूला भी रखा गया है जो सोने की प्लेटों से बनाया गया है। गुरु जी अपने बचपन में इस क्रेडल में सोते थे। उनकी तलवार और तीर आदि को भी संजोकर रखा गया है। Read Also : ब्रह्म मुहूर्त में जागरण क्यों ?

गुरुद्वारा भट्ठा साहिब

9 . गुरुद्वारा भट्ठा साहिब

यह गुरुद्वारा रोपर -चंडीगढ़ रोड पर कोटला निहंग गांव में स्थित है। यह रोपर रेलवे स्टेशन से 3 किलोमीटर और आनंदपुर साहिब से 40 किलोमीटर दूर है। गुरुद्वारा भट्टा साहिब एक ऐतिहासिक गुरुद्वारा है क्योंकि यहाँ चार बार गुरु गोविंद आ चुके हैं। गुरु जी पहली बार 1745 में यहाँ आये थे। इसी वर्ष सिक्खों के दसवें गुरु आनंदपुर से भगानी पर विजय प्राप्त करने के बाद वापस आये और वहां के मजदूरों से उन्होंने ठहरने के लिये जगह पूछी तो मज़दूरों ने उन्हें एक जलता हुआ भट्ठा आराम करने के लिये बताया। जब गुरु जी उस भट्टे के पास गए तब उसमें जलती गर्म ईंटें ठंडी हो गईं। और ऐसा लगा जैसे वे गुरु जी का स्वागत कर रही हैं। इसी वजह से इस स्थान को गुरुद्वारा भट्टा साहिब कहते हैं।

री गुरुतेग बहादुर साहिब गुरुद्वारा

10. श्री गुरुतेग बहादुर साहिब गुरुद्वारा

श्री गुरुतेग बहादुर साहिब गुरुद्वारा भारत के असम में स्थित है। सिक्खों के पहले गुरु, गुरु नानक देव यहाँ 1505 में आये और श्री मंता शंकर देव से मिले। इस गुरूद्वारे का सफ़ेद रंग देखने में बहुत सुंदर लगता है। प्रवेश द्वार पर बनीं सीढियां लाल रंग की हैं। श्री गुरु तेग बहादुर ने 17 वीं शताब्दी में इस गुरूद्वारे का विस्तार किया। इस गुरूद्वारे में पूजा पाठ और शहीदी गुरु पर्व मनाने के लिए  देश विदेश से श्रद्धालु आते हैं। शहीदी गुरु पर्व गुरु तेग बहादुर के नाम पर मनाया जाता है। Read Also : वैदिक मान्यताः गर्भाधान कब, क्यों और कैसे ?

गुरु नानक दरबार

11 . गुरु नानक दरबार

यह गुरुद्वारा दुबई में स्थित है । इसका निर्माण जून 2010 में हुआ।  यह ऐसा पहला गुरुद्वारा था जो गल्फ क्षेत्र में स्थित था। इस गुरूद्वारे की बिल्डिंग के निर्माण के लिए 25,400 स्क़ायर फ़ीट ज़मीन शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने दी थी। धार्मिकता और आधुनिकता को दर्शाने का बहुत अच्छा उदहारण है।इस गुरूद्वारे के निर्माण में करीब  20 मिलियन डॉलर खर्च हुआ था ।

गुरुद्वारा श्री दाता बंदी छोड़ साहिब

12 . गुरुद्वारा श्री दाता बंदी छोड़ साहिब

गुरुद्वारा श्री दाता बंदी छोड़ साहिब मध्यप्रदेश के ग्वालियर में स्थित है। यह ग्वालियर किले की चोटी पर बना हुआ है। इसका नाम बंदी छोड़ इसलिए रखा गया क्योंकि 52 राजपूत शाशकों को, जो ग्वालियर जेल में कैदी थे, को छोड़ा गया था।  सिक्खों के छठवें गुरु हरगोबिंद सिंह जी इस किले में जहांगीर के स्वास्थय के लिए प्रार्थना करने गए थे। वहीँ वे उन शाशकों से मिले और उन्होंने उन शाशकों को वहां से रिहा कराया। इसका निर्माण 1970 में हुआ। पूरे भारत में गुरुद्वारा श्री  दाता बंदी सिक्खों के लिए महत्वपूर्ण तीर्थस्थान है। इसका बहिर्भाग मार्बल और रंगीन कांच का बना हुआ है।यह गुरुद्वारा छः एकड़ में फैला है। यहाँ बड़े से हॉल में गुरु का लंगर कराया जाता है।

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